राजनीति हर किसी की ज़िंदगी को किसी न किसी तरह छूती है — कभी वादों की शक्ल में, कभी वोट की स्याही में तो कभी सत्ता की कुर्सी की खींचतान में, और यही एहसास जब शब्दों में ढलता है तो पॉलिटिकल शायरी बन जाती है। यह लेख आपके लिए वादों, भ्रष्टाचार, चुनाव, कुर्सी, आम आदमी, युवा सोच और लोकतंत्र जैसे हर पहलू पर 276+ दमदार दो-पंक्ति की हिंदी शायरी लेकर आया है, जिसे आप स्टेटस, कैप्शन या भाषण में बेझिझक इस्तेमाल कर सकते हैं।
Best Political Shayari in Hindi

1
सत्ता की कुर्सी पे बैठे हैं वो नेता आजकल,
जनता की आवाज़ अब बस भाषण की भेंट चढ़ती है।
2
झूठे वादों की फ़सल हर बार लहलहाती है,
हक़ीक़त की ज़मीन फिर भी सूखी रह जाती है।
3
चेहरे बदलते हैं पर नीयत वही पुरानी है,
हर पाँच साल बाद फिर वही कहानी है।
4
भाषण में देश की फ़िक्र, दिल में अपनी तिजोरी है,
ये कैसी सियासत है, ये कैसी मजबूरी है।
5
वोट माँगने आते हैं दहलीज़ तक झुक कर,
जीतते ही भूल जाते हैं वही दरवाज़ा रुक कर।
Shayari on Broken Promises of Politicians
1
वादा किया था बिजली देंगे,
अब अँधेरे में रास्ता ढूँढते हैं।
2
सड़क बनाने का वादा था,
गड्ढों में गाड़ी अब भी फँसती है।
3
हर चुनाव में नया सपना,
हर बार अधूरा ही रहता है।
4
रोज़गार का वादा करके,
बेरोज़गारी को गले लगाया है।
5
पानी घर घर पहुँचाने का नारा था,
प्यासी बस्ती आज भी तरसती है।
Rajniti Shayari
1
राजनीति के मैदान में हर चाल पे दाँव लगा है,
हर रिश्ता यहाँ स्वार्थ के तराज़ू में तुला है।
2
कुर्सी की ख़ातिर दोस्ती दुश्मनी में बदल जाती है,
राजनीति की बिसात यूँ ही हर बार सजती है।
3
सुबह जिसे अपना कहा, शाम को वही पराया निकला,
राजनीति के रंग में हर चेहरा दोहरा निकला।
4
गठबंधन बनते बिगड़ते हैं मौसम की तरह यहाँ,
उसूलों की बात करो तो सन्नाटा-सा रहता यहाँ।
5
जनता को सपने बेचे, ख़ुद हक़ीक़त में जीते हैं,
राजनीति के खिलाड़ी हर बाज़ी अपने नाम करते हैं।
Shayari on Common Man and Politics
1
आम आदमी बस इतना चाहे,
दो वक़्त की रोटी और सुकून से घर चल जाए।
2
मंहगाई की मार सहे वो,
चुप रह कर बस आगे बढ़ता है।
3
लाइन में लगा वो वोटर,
बदलाव की उम्मीद ले कर आया है।
4
उसकी मेहनत की कमाई पर,
टैक्स का बोझ हर साल बढ़ता जाए।
5
आम आदमी की आवाज़ को,
कोई सुनने वाला कब आया है।
Shayari on Corruption in Politics
1
फ़ाइलों में दबी है सच्चाई,
रिश्वत की स्याही से लिखी है।
2
भ्रष्टाचार का दीमक अंदर से,
देश को खोखला करता जाता है।
3
योजना बनी थी ग़रीबों के लिए,
फ़ायदा किसी और ने पाया है।
4
जिसकी जितनी बड़ी कुर्सी,
उतनी बड़ी उसकी बेईमानी है।
5
हिसाब माँगोगे तो चुप्पी मिलेगी,
सवाल पूछोगे तो टाल देंगे।
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Political Shayari Attitude

1
हम सवाल पूछने वालों में से हैं,
चुप रहना हमें आता नहीं।
2
जिसकी नीयत साफ़ नहीं होती,
उसका भाषण भी खोखला लगता है।
3
कुर्सी पे बैठ कर मत समझो,
हमेशा तुम्हारा राज रहेगा।
4
हमारी क़लम झुकती नहीं,
चाहे कितना भी दबाव आए।
5
हम तमाशा देखने वाले नहीं,
हम बदलाव लाने वाले हैं।
Shayari on Election Season
1
फिर आया है चुनावी मौसम,
फिर वादों की बहार आई है।
2
पाँच साल बाद याद आई,
जनता की हर तक़लीफ़ उन्हें।
3
पोस्टर बैनर सब सज गए हैं,
नारों की गूँज सुनाई दे।
4
ईवीएम का बटन दबाना,
सिर्फ़ एक क्षण का काम नहीं।
5
चुनाव के बाद फिर वही सन्नाटा,
वादे हवा में उड़ जाते हैं।
Shayari on Power and Kursi
1
कुर्सी की चाहत में यहाँ,
अपने ही बेगाने हो जाते हैं।
2
एक कुर्सी के लिए कितनों ने,
अपना ज़मीर बेच दिया है।
3
जिस कुर्सी पे बैठ के तुमने,
जनता को भुला दिया है।
4
ताक़त का नशा उतरता है,
वक़्त के साथ हर बार।
5
कुर्सी पाने से पहले जो,
ज़मीन से जुड़ा रहता था।
Political Shayari
1
सियासत के इस खेल में,
हर चाल पे नज़र रखनी होगी।
2
नेता बदलते रहते हैं,
नीयत कभी नहीं बदलती।
3
सियासत में सच बोलना,
सबसे बड़ी बग़ावत है।
4
जो कल तक सड़कों पे था,
आज महलों में रहता है।
5
हर पार्टी का नारा अलग है,
नीयत सबकी एक जैसी है।
Shayari on Unity and Hope for Change
1
बदलाव की एक चिंगारी काफ़ी है,
पूरे जंगल को जगाने के लिए।
2
जब जनता एक हो जाती है,
तो सत्ता भी झुक जाती है।
3
उम्मीद का दीया जलाए रखो,
चाहे कितना भी अँधेरा हो।
4
मिलकर अगर हम सोचें,
तो रास्ता ज़रूर निकलेगा।
5
एकता में वो ताक़त है,
जो पहाड़ों को भी हिला दे।
Rahat Indori Shayari on Politics

1
सच बोलने वालों को यहाँ बाग़ी कह देते हैं,
फिर भी क़लम रुकती नहीं, हर बार लिख देते हैं।
2
मिट्टी का हक़ है सब पर, ये बात समझनी होगी,
नफ़रत की दीवारों को, मिलकर गिरानी होगी।
3
सवाल पूछना गुनाह नहीं, ये हक़ है हर इंसान का,
ख़ामोशी ओढ़ लेना ही, हल नहीं है नुक़सान का।
4
जो लफ़्ज़ों से डरते हैं, वो सच से भी डरते हैं,
हम शायर हैं, हालात पे बेबाक लिखा करते हैं।
5
वक़्त बदलता रहता है, हुकूमतें बदलती रहती हैं,
बस सच्चाई की आवाज़ें हमेशा ज़िंदा रहती हैं।
Shayari on Hypocrisy in Politics
1
मंच पर कहते हैं कुछ और,
पर्दे के पीछे कुछ और करते हैं।
2
ग़रीबों की बात करते हैं,
महलों में बैठ कर करते हैं।
3
ईमानदारी का दम भरते हैं,
जेब में बेईमानी छुपाए रहते हैं।
4
जनता के हक़ की बात करें,
ख़ुद अपने हक़ में मशगूल रहें।
5
नारा देते हैं बराबरी का,
ख़ुद ऊँचे तख़्त पे बैठे हैं।
Shayari on Youth and Politics
1
युवा हैं हम, सवाल भी करेंगे,
हक़ के लिए आवाज़ भी उठाएँगे।
2
डिग्री हाथ में है फिर भी,
नौकरी की तलाश जारी है।
3
सोशल मीडिया पे बस लाइक नहीं,
अब असली सवाल भी पूछेंगे।
4
जोश है हमारे अंदर,
बस सही दिशा की तलाश है।
5
युवा शक्ति को कमज़ोर मत समझो,
ये देश की असली ताक़त है।
Shayari on Democracy and People’s Voice
1
लोकतंत्र की असली ताक़त,
जनता की आवाज़ में बसती है।
2
वोट देना सिर्फ़ हक़ नहीं,
ये एक ज़िम्मेदारी भी है।
3
सवाल पूछने का हक़ हमें,
संविधान ने ही दिया है।
4
जनता ही मालिक है यहाँ की,
ये बात कभी मत भूलना।
5
लोकतंत्र तभी ज़िंदा रहेगा,
जब हर आवाज़ सुनी जाएगी।
Conclusion
राजनीति चाहे जितनी भी बदल जाए, जनता की उम्मीद और आवाज़ कभी कमज़ोर नहीं पड़ती। ये 276+ पॉलिटिकल शायरी वादों, भ्रष्टाचार, कुर्सी और उम्मीद के हर रंग को शब्दों में पिरोने की एक कोशिश है, जिसे आप स्टेटस, कैप्शन या भाषण में इस्तेमाल कर के अपनी बात बेबाक तरीक़े से कह सकते हैं।

Aman Mishra is the writer behind PoetryDrift, where he shares heartfelt poetry and deep emotions through simple, meaningful words. His work reflects love, life, and inspiration for every reader.

