Best Allama Iqbal Shayari in Hindi (2026) | अल्लामा इक़बाल शायरी

Allama Iqbal, known as the Poet of the East, remains one of the most quoted Urdu poets of all time, and his Allama Iqbal shayari in Hindi continues to inspire millions of readers across generations.

His verses on khudi (self-respect), love, faith, and national pride carry a rare blend of philosophy and emotion that feels just as powerful today as it did a century ago.

In this collection, you will find his most iconic couplets organised into easy, two-line shers covering motivation, romance, student life, and Islamic wisdom, so you can quickly find the perfect lines to read, share, or reflect on.

Allama Iqbal Shayari

Allama Iqbal Shayari

1.

सब कुछ सिखा रखा है वाइज़ को,

ये हज़रत देखने में सीधे-सादे भोले-भाले हैं।

2.

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा,

तेरे सामने आसमाँ और भी हैं।

3.

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।

4.

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं,

अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं।

5.

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं,

तू मेरा शौक़ देख, मेरा इंतज़ार देख।

6.

नहीं है नाउम्मीद इक़बाल अपनी कश्त-ए-वीराँ से,

ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है साक़ी।

7.

वतन की फ़िक्र कर नादाँ, मुसीबत आने वाली है,

तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में।

8.

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है,

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।

9.

अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़िंदगी,

तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन।

Allama Iqbal Shayari 2 Line

1.

जफ़ा जो इश्क़ में होती है वो जफ़ा ही नहीं,

Also Read This  Best 99+ Sorry Shayari in Hindi | Heart-Touching Sorry Shayari (2026)

सितम न हो तो मोहब्बत में कुछ मज़ा ही नहीं।

2.

इश्क़ भी हो हिजाब में, हुस्न भी हो हिजाब में,

या तू ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर।

3.

नज़र नज़र का फ़र्क़ होता है हुस्न का नहीं,

इक़बाल महबूब जिसका भी हो जैसा भी हो बे-मिसाल होता है।

4.

तेरे इश्क़ की इंतहा चाहता हूँ,

मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ।

5.

भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी,

बड़ा बे-अदब हूँ, सज़ा चाहता हूँ।

6.

जिनके आंगन में अमीरी का शजर लगता है,

उनका हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है।

7.

इश्क़ तेरी इंतहा, इश्क़ मेरी इंतहा,

तू भी अभी न तमाम, मैं भी अभी न तमाम।

8.

अपने भी ख़फ़ा मुझसे हैं, बेगाने भी न ख़ुश,

मैं ज़हर-ए-हलाहल को कभी कह न सका क़ंद।

9.

सौ सौ उम्मीदें बंधती हैं इक इक निगाह पर,

मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।

Allama Iqbal Shayari For Students

1.

सबक़ फिर पढ़ सदाक़त का, अदालत का, शुजाअत का,

लिया जाएगा तुझसे काम दुनिया की इमामत का।

2.

जिस इल्म की तासीर से ज़न होती है ना-ज़न,

कहते हैं उसी इल्म को अरबाब-ए-नज़र मौत।

3.

तुझे किताब से मुमकिन नहीं फ़िराक़,

कि तू किताब-ख़्वाँ है मगर साहिब-ए-किताब नहीं।

4.

मिलेगा मंज़िल-ए-मक़सूद का उसी को सुराग़,

अंधेरी शब में है चीते की आँख जिसका चराग़।

5.

आँख जो कुछ देखती है लब पे आ सकता नहीं,

महव-ए-हैरत हूँ कि दुनिया क्या से क्या हो जाएगी।

6.

तेरे इल्म-ओ-मोहब्बत की नहीं है इंतहा कोई,

नहीं है तुझसे बढ़कर साज़-ए-फ़ितरत में नवा कोई।

7.

अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर,

हर फ़र्द है मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा।

8.

उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में,

नज़र आती है उनको अपनी मंज़िल आसमानों में।

9.

यक़ीन मोहकम, अमल पैहम, मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम,

जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्द-ए-मोमिन के शमशीर।

Also Read This  Best 196+ Rangdari Shayari in Hindi (2026) | दबंग और रॉयल रंगदारी शायरी

Iqbal Shayari

Iqbal Shayari

1.

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुंबद पर,

तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में।

2.

वजूद-ए-ज़न से है तस्वीर-ए-कायनात में रंग,

इसी के साज़ से है ज़िंदगी का सोज़-ए-दरूँ।

3.

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब,

क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो।

4.

जिन्हें मैं ढूँढता था आसमानों में ज़मीनों में,

वो निकले मेरे ज़ुल्मत-ख़ान-ए-दिल के मकीनों में।

5.

महीने वस्ल के घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं,

मगर घड़ियाँ जुदाई की गुज़रती हैं महीनों में।

6.

बुरा समझो उन्हें मुझसे तो ऐसा हो नहीं सकता,

कि मैं जिसका तमन्ना हूँ वो मेरा हो नहीं सकता।

7.

हो दीद का जो शौक़ तो आँखों को बंद कर,

है देखना यही कि न देखा करे कोई।

8.

न तू ज़मीन के लिए है न आसमान के लिए,

जहाँ है तेरे लिए तू नहीं जहाँ के लिए।

अल्लामा इक़बाल शायरी

1.

ग़ुलामी में नहीं काम आतीं शमशीरें न तदबीरें,

जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें।

2.

पानी पानी कर गई मुझको क़लंदर की ये बात,

तू झुका जब ग़ैर के आगे न मन तेरा न तन।

3.

चराग़-ए-राह है, मंज़िल नहीं है इसे मालूम,

कि कारवाँ के लिए राह कौन रोकता है।

4.

ख़ुदी की जल्वतें हज़ार रंगीं,

ख़ुदी की ख़लवतें हज़ार रंगीं।

5.

तक़दीर-ए-उमम क्या है कोई कह नहीं सकता,

मोमिन की फ़िरासत हो तो काफ़ी है इशारा।

6.

बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यों,

कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मेरा इंतज़ार कर।

7.

दिल पाक नहीं तो पाक हो सकता नहीं इंसान,

वरना इबलीस को भी आते थे वुज़ू के फ़राइज़ बहुत।

8.

तेरे सजदे तुझे कहीं काफ़िर न कर दें इक़बाल,

तू तो झुकता कहीं और है और सोचता कहीं और है।

Allama Iqbal Ki Shayari

1.

सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा,

हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलसिताँ हमारा।

Also Read This  Cute Smile Shayari 2 Line in Hindi with Images | मुस्कान पर शायरी – 2026

2.

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,

हिंदी हैं हम वतन है हिंदोस्ताँ हमारा।

3.

पर्बत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का,

वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।

4.

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी,

सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा।

5.

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा सब मिट गए जहाँ से,

अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा।

6.

इक़बाल कोई महरम अपना नहीं जहाँ में,

मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा।

7.

बातिल से दबने वाले ऐ आसमाँ नहीं हम,

सौ बार कर चुका है तू इम्तिहाँ हमारा।

8.

ये कफ़न, ये क़ब्र, ये जनाज़े रस्म-ए-शरीयत है इक़बाल,

मर तो इंसान तभी जाता है जब याद करने वाला कोई न हो।

Allama Iqbal Shayari in Hindi

1.

क्यों ज़ियाँ-कार बनूँ, सूद-फ़रामोश रहूँ,

फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ, महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ।

2.

ख़ुदा तुझे किसी तूफ़ान से आशना कर दे,

कि तेरे बहर की मौजों में इज़तिराब नहीं।

3.

अगर हो ज़ौक़-ए-तलब तो निकल ग़ुबार से तू,

बंधा हुआ है फ़क़त बंद-ए-इख़्तियार से तू।

4.

अपनी दुनिया आप पैदा कर अगर ज़िंदों में है,

सिर्र-ए-आदम है ज़मीर-ए-कुन फ़काँ है ज़िंदगी।

5.

हर शय मुसाफ़िर हर चीज़ राही,

क्या चाँद तारे क्या मुर्ग़-ओ-माही।

Allama Iqbal Islamic Shayari

Allama Iqbal Islamic Shayari

1.

क़ुव्वत-ए-इश्क़ से हर पस्त को बाला कर दे,

दहर में इस्म-ए-मुहम्मद से उजाला कर दे।

2.

ख़िरद ने कह भी दिया ला-इलाहा तो क्या हासिल,

दिल-ओ-निगाह मुसलमान नहीं तो कुछ भी नहीं।

3.

मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमां की हरारत वालों ने,

मन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन न सका।

Conclusion

Allama Iqbal’s poetry is timeless because it speaks directly to the heart, whether you are chasing a dream, falling in love, studying for your future, or seeking spiritual strength. These shayari collections are meant to be revisited often, so save your favourite couplets and let Iqbal’s words of khudi and courage guide you through everyday life.

Leave a Comment